छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
By RJ Rekha (RekhaRani)
छांव नहीं और धूप कड़ी हो सकती है,
छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
मिलकर चलें साथ तो क्या बात है,
मंज़िल ख़ुद आकर सामने खड़ी हो सकती है.
छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
हो रात अंधियारी भले तू ग़म ना कर,
यक़ीन रख तारों जड़ी हो सकती है.
छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
कड़के अगर बिजली संभल पर डर नहीं,
दो पहर ठहर सावन की झड़ी हो सकती है.
छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
इंसान अगर इंसान से मिलकर चलें,
हर−पल यहां ख़ुशियो की लड़ी हो सकती है
छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
ना सोच अब तक क्या दिया इस देश को,
शुरुआत की कोई भी घड़ी हो सकती है.
छोटीछोटी कोशिशें बड़ी हो सकती हैं.
By RJ Rekha (RekhaRani)

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