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छठ पर्व

May 3, 2023
1 min read

By Swati Sudha


चार दिनों के उत्सव में,

हर तरफ प्रकृति का स्पर्श,

नहाए खाए से लेकर,

घाट पर पारन तक।।


शरद ऋतु के आगमन का संदेशा देता ये पर्व,

झूम कर लाता है नई फसलों की बहार,

गेहूँ और गन्ने को मिलाकर लाता है ठेकुआ की मिठास,

नए चावल और नए गुड़ के साथ अर्पित होता है कसार। ।


पूजा के समय रहते बस पूज्य और पूजने वाले,

बीच में नही रहते कोई जोड़ने वाले,

पूज्य भी ऐसे साकार, प्रतिदिन दर्शन देने वाले,

जिनके आहट मात्र से ही जुड़ जाते दोनों हाध।।


मन को तृप्त करने वाले लोकगीतों के साथ,

प्रार्थना, मनुहार कर हम खो जाते अपने आराध्य के पास,

दिल की भावनाओं को जैसे एक पावन रास्ता मिल जाता,

चार दिनों का कठिन छठ पर्व आसान हो हमें भी पावन बना देता



सबसे संतोषप्रद बात, सदियों से इस पर्व की वाहक रहीं महिलाएँ,

छठव्रतियों को देख अनायास उनका मिलान हो जाता प्राचीन पूजनीय महिलाओं के साथ,

उससे भी सुंदर बात, छठ गीतों में बेटियों की चाह और बखान,

छठ पर्व और गीतों में महिलाओं को मिला है सम्मानपूर्वक स्थान।


डूबते सूर्य से लेकर, उगते सूर्य तक का पूजन,

हमारे पूर्वजों के वृहत सोच का है उदाहरण,

प्रकृति प्रेम,विविधता, और विशालता को दिखाता ये पर्व,

सिखाता है आधुनिक मानव को जीवन के सही आयाम। ।


जैसे अपनी स्वच्छता से परे वातावरण को भी स्वच्छ रखना,

संयमित जीवन के साथ सभी से संतुलन बनाए रखना,

ऊँच-नीच का भेद छोड़ सभी को समान अवसर देना,

और पूर्वजों की इस धरोहर को संजोए रखना ।।


By Swati Sudha




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