चिट्ठी
Updated: Dec 6, 2022
By Purvi Agarwal
चिट्ठी लिख रही हूँ आज आपको
ताकि आपको पता चल सके
कि आपकी बिटिया कैसी है
जैसी छोड़ के गए थे
क्या अब भी वैसी है?
क़ाश आपकी नन्ही गुड़िया
हमेशा वही रह पाती
पर समय ने बड़ा कर दिया है मुझे
सभी काम आपने
खुद करने लग पड़ी हूँ
आपने सहारे के बिना
ज़िन्दगी के चौराहें पे
अकेली खड़ी हूँ ।
कभी भगवान से नाराज़ होती हूँ
की उन्होंने आपको इतनी जल्दी क्यों बुला लिया
इतना प्यार करती थी मैं अपने पापा से
फिर उन्होंने आपको मुझसे क्यों चुरा लिया?
पता है, अब कोई मेरी दिन भर की
कहानियां नही सुनता
मैंने गोलगप्पे खाए या नही
ये भी कोई नही गिनता
कोई ऐसी जेब नही अब
जिससे बिन पूछे पैसे निकाल सकू
ना कोई ऐसी गोद है
जिसमें सर रख कर, चैन से सो सकू
अब ऐसी आँखे भी नही
जो मेरे संग रोती है
ना ही कोई ऐसा शख़्स है
जो सबको गर्व से बताए
"हाँ, ये मेरी बेटी है"
मन करता है फिर से आपकी
वही नन्ही गुड़िया बन जाऊं
जिसको बिन बिजली की
गरम रातों को
आप अपनी गोद में सुलाते थे
जिसके बिना खाना खाएं
आप एक कौर भी नहीं खाते थे
बिना कुछ मांगे आपसे
आप सब कुछ ला कर देते थे
"बता तुझे और क्या चाहिए"
फिर भी पूछा करते थे
अब कहती हूँ
लाकर दे दो पापा मुझे मेरे
कोई और मुझे आपके जितना प्यार नही करता
मुझे हँसता हुआ देखने के लिए
अब कोई टेढ़ी-मेढ़ी हरकते भी नही करता
कितनी याद आती है आपकी
ये मैं आपको कैसे बताऊ
कितनी राते रोती हुई गुज़ारी है
अब अपना तकिया आपको कैसे दिखाऊ
जब छोटी थी तब आप खुद ही
सब समझ जाया करते थे
कोई दुःख ना आये मुझपे कभी
बस यही चिंता करते थे
आज मैं जो भी हूँ
उसके लिए आपकी ही शुक्र गुज़ार हूँ
अब लगता है
उस चौराहें से
अकेले ही आगे बढ़ने को
मैं तैयार हूँ
जानती हूँ कि नही आ सकते आप
इसीलिए कभी मैं रब से फ़रियाद नही करती
आपकी सीखों के सहारे
आप मेरे अंदर हमेशा ज़िंदा रहेंगे
बस, इतना हूँ आपसे मैं वादा करती ..
By Purvi Agarwal

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