चाहूँ तो मैं
By Rashmi Mahish
चाहूँ तो मैं कितना समझाऊँ
हर बार यही बात मैं अपने मन में पाऊँ
बड़ी बड़ी ख्वाहिशो में
छोटी मैं अपनी जिन्दगी है पाऊँ ।
चाहूँ मैं हर खुशियाँ पाऊँ
पर किस्मत को अपनी मैं कैसे मनाऊँ
वैसे तो लाखो दुःख पार कर जाऊँ
जब साँसे बोले मैं तुम्हारा साथ निभाऊँ ।
भूल तो मैं सारे गम जाऊँ
जब किस्मत मेरा साथ निभाये
लड़ तो मैं सबसे जाऊँ
पर उम्मीदे मेरी कहीं हार न जाये ।
खुशहाल मैं अपनी दुनियाँ बनाऊँ
क्या जिन्दगी मे मैं इसके काबिल रह पाऊँ
फिर भी हंसते - हंसते मैं यही गुनगुनाऊँ
अपनी नहीं तो दुसरों की दुनियाँ में मैं खुशियाँ भर जाऊँ ।
By Rashmi Mahish

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