चाहिए अब तू नहीं, तेरी जुस्तुजू भी नहीं।
By Surya Kant Pawar
चाहिए अब तू नहीं, तेरी जुस्तुजू भी नहीं।
थक गया मैं दहलीज़ पर खड़े खड़े,
जा जाकर मेरे लिए अब जाम लेकर आ।
हर बार-हर मर्तबा नए बहाने ढूंढें तूने,
इस बार कोई और नयी बात लेकर आ।
चौखट से उठाकर सीने से लगा लेना, तेरी फितरत तो नहीं,
जा जाकर मेरे दर्द का सामान लेकर आ।
टीसते ज़ख्मों को मरहम की जरूरत ही नहीं,
हो सके तो राख दिल के लिए आंच लेकर आ।
छिप गया ऐ इश्क़ तू हर बार मुझे देखकर,
मैं छुप सकूँ अब तुझसे, मेरे लिए कोई हिज़ाब लेकर आ।
चाहिए अब तू नहीं , तेरी जुस्तजू भी नहीं।
By Surya Kant Pawar

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