चाहतो का जहाँ
By Vibha Singh
अपनी चाहतो का जहाँ किसीको मिलता है कहाँ।
आज नामो-निशान भी नहीं, कभी दोनों के कदम जिस मंजिल को थे रवाँ।।
तुम भूल गये, हम आज भी खड़े हैं वहाँ,कभी फूल मोहब्बत के खिले थे जहाँ, खुशबू फैली थी फिजाओ में, सरगोशियाँ थी सब दिशाओं में,
आज हालात और हैं, खामोश है दिल, मेरी आखों में बहते पानी का
शोर है।
कसमे वादे भी हो गये धुऑ।।
आज नामो-निशान भी नहीं कभी दोनों के कदम जिस मंजिल को थे रवाँ ।।
By Vibha Singh

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