चाय और कॉफ़ी
By Dharam Singh Meena
तुम्हारी चाय में जो मिठास हैं कुछ ऐसा ही मेरे दिल का अहसास हैं,
मन करता हैं जब तुमसे मिलने का बना लेता हूँ बहाना उस चाय का स्वाद चखने का|
उस चाय संग कुछ हसीं पल तुमसे बाँट लू जो कह दो तुम एक बार तो ये जिंदगी क्या सातो जन्म तुम्हारे उस रब से माँग लू|
नहीं पसंद हैं चाय पर इस बहाने से पी लेता हूँ कि कुछ हसीं पल तुम्हारे साथ इसी चाय के बहाने जी लेता हूँ|
तुमको चाहूँ इतना जिसकी कोई हद नहीं करू प्यार तुमसे इतना जिसकी कोई सरहद नहीं |
मेरी तरह तुम भी मेरी कॉफ़ी का स्वाद चख लेना जो ना आये पसंद तो झूठ बोलकर ही मेरा दिल रख लेना |
हां हूँ मैं कड़वा कॉफ़ी जैसा लेकिन इसका नशा भी ख़ास हैं,
तेरे लिए कुछ अलग ही सही पर ये मेरे दिल का प्यार भरा अहसास हैं |
अब ये चाय भी हमें अच्छी लगने लगी, हर जगह ये प्यारी सूरत मुझे दिखने लगी,
डरता हूँ खो न दूँ इस प्यारी सी परछाई को, इस लिए वापिस आ जाता हूँ अपनी कॉफ़ी कि सच्चाई पर|
तुम्हारी चाय में जो मिठास हैं कुछ ऐसा ही मेरे दिल का अहसास हैं|
By Dharam Singh Meena

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