चवन्नी अठन्नी
By भारती बिंदु
प्रचलन हो डिजिटल का तो
अठन्नी चवन्नी छुप है जाती!
बंद रखे छोटे बक्से पेटी से
झन से खन से दिख जाती !!
था ज़माना कभी उसका भी
जब वो बाज़ार चलती थी !
दिल ही नहीं हुज़ूर मुस्कान
भी चवन्नी में ही मिलती थी !!
कैश लेस हो गया ज़माना
हृदय विहीन संसार हुआ !!
चवन्नी अठन्नी छिपे भीत से
बड़ा महँगा व्यापार हुआ!!
By भारती बिंदु

Comments