चलते चल तू आगे
By Siddharth Janartha
दुनिया में आकर चैन नहीं है
इस दिन की कोई रैन नहीं है
मेहनत तो करनी पड़ती है
हरदम यूं सांसें लड़ती हैं
जितना करो है काम उतना
है क्या किसी में दम इतना
जो तेज़ वक्त से भागे
लेकिन जो भी हो
चलते चल तू आगे
कभी धूप है कभी है छांव
छाले पड़ गए दुखते पांव
आग का दरिया समझो जग को
लेकिन मैं कहता हूं सबको
रुकना मत के चलते जाना
बात बात भी दिल को दुखाना
ऐसे में ये मन ना लागे
लेकिन जो भी हो
चलते चल तू आगे
सफर तो है दुनिया में एक
मंजिल एक तो राह अनेक
साहस रखना पड़ता है हां
मंजिल तभी मिलेगी यहां
वह पाए जो जाए
या जो जागे सो पाए
या सो पाए जो जागे
मैं कहता हूं तुझसे
चलते चल तू आगे
By Siddharth Janartha

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