चल फिर से मिलें
By Suchita Joshi
चल फिर से मिलें
दो अजनबियों की तरह
जो तू पूछे मेरा पता
तो मैं कांपते होठों से
तेरे घर से होकर गुजरती
वो आंखिरी वाली गली कहूं ।।
जो तू पूछे मेरा पसंदीदा रंग
तो मैं तेरे प्यार में घुलता
वो रंग आसमानी कहूं ।।
जो तू बिखरे गेसुओं को
मेरे चेहरे से हटाए
मैं पहले की तरह शर्म से
पलकें झुकाए रहूं ।।
जो तू मेरी तारीफ में
आधी अधूरी नजमें पढ़े
तेरी नजर से बचने को
मैं हजार टोटके करूं ।।
जो तू थामे फिर से हाथ मेरा
जिंदगी भर साथ चलने को
तो मैं फलक तक चलूं ।।
By Suchita Joshi

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