चंद पल
By Tushar devendra sail
जैसे कोई दरवाजे पर दस्तकत कर रहा हो
वैसे दिल और दो बार धड़का
मूड कर देखा तो किसी नज़र ने धप्पा दिया
मेरे मूड कर देखने से वो असहज हुए
और शर्म का लिबास पहनते
कुछ लफ्ज आँखों से गिरा दिए
और लफ्ज कुछ इस प्रकार हवा में घुल गए
की मुझे उनकी आंखे और दिल एक समान लगने लगे
और निशाना लगाते लगाते मेरे तिर खत्म हुए.
चली गई वो
अपनी जिस्म का ईत्र मेरे मनगट पर रगड कर
कीमेंकभीखुशबुपानेउनकेबगिचेमेपहचूं
By Tushar devendra sail

Comments