घर में अब ऐसा कोई क़ागज़ नहीं है ना लिखा हो जिस पर नाम तुम्हारा
Updated: Jun 2, 2023
By Manish Joshi
घर में अब ऐसा कोई क़ागज़ नहीं है ना लिखा हो जिस पर नाम तुम्हारा,
क्या बाम क्या दर क्या छत क्या दीवारें हर जगह पर है क़याम तुम्हारा।
रातें कटी हैं सितारों को गिन-गिन सूरज में जल-जल बिताए गए दिन,
इस सुलगते दिल को मिले कुछ ठंडक, दिख जाए जो चेहरा किसी शाम तुम्हारा।
दुनिया तो चाहे ज़र के समंदर, दुनिया तो मांगे सितारों के ज़ेवर,
दुनिया को मिले दुनिया जो चाहे हमको तो बस इक सलाम तुम्हारा।
ख़बर कुछ तुम्हारी जो आ जाए तो जीने के बारे में सोचा जाए,
फ़ना भी हों कैसे कि जब तलक ना आ जाए पयाम तुम्हारा।
By Manish Joshi

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