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घर की राजकुमारी

Apr 28, 2023
2 min read

By Vikas Kumar Lodhi


जुड़वा पैदा हुए हम, सबने कहा घर आए है राजकुमार और राजकुमारी|

पर असल में, सबसे आखिरी में आती है मेरी खुशियों की बारी||


लड़की – लड़के सब बराबर है, ये कहते स्कूल में मास्टर जी|

सिर्फ किताब में ही पढा ये, असल जिंदगी में कहां ये हासिल थी||


10 मिनट देर से सोकर उठने पर, घोड़े बेचकर सोने का मिलता है ताना|

और उसे देर तक सोने के लिए, नहीं करना पड़ता है कोई बहाना||





कम rank आने पर, सुनने को मिलता है अपने भाई से कुछ सीखो|

पूरे घर का काम करने के बाद, कैसे और कितना पढ़ती हूं ये भी तो देखो||


मैनें मेहनत की और अगले परीक्षा में उसे कर दिया पीछे|

शहर के किसी बड़े स्कूल में किया दाखिला उसका, कहा तू चिराग है घर का नहीं रह सकता पीछे||


जैसे सेवा अभी कर रही, वैसे ही जिंदगी भर कर सकती हूं|

क्यों पराया धन समझते हो मुझे, घर का चिराग मैं भी हो सकती हूं||


मुझे शाम होने के बाद, घर से निकलने की है मनाही|

और वो रात भर दोस्तों के संग करता – फिरता है मनमानी||


मैने मां से कहा ऐसे बेटों को रख घर के अंदर, तभी हम बेटियां घर से बाहर निकल पायेंगी|

मां ने कहा चुप बेशरम, क्या ससुराल में भी एसे ही जबान लड़ाएगी||


उसने अपने Birthday पे नयी Bike की demand रखी|

वो घर का एक लौता है न, तो उसके demand के आगे मेरी कुछ जरूरतें भी पूरी न हो सकी||


कुछ इच्छाएं मेरी भी है, पर पापा को कड़ी मेहनत करते देख मैने जरूरतों को ही इच्छा बना ली|

घर की एक लौती हूं न, ये सब सोचने की जिम्मेदारी मैने अपने सर उठा ली||


हलषष्ठि में मां और भाईदूज में मैं, व्रत के साथ सजातीं है आरती की थाली|

मैने उसे अपने दोस्तों को देते सुना है मां – बहन की गाली||


सोचती हूँ जन्में है एक साथ, तो मैं ही क्यों झेलूं इतना कुछ|

भाईदूज की ही तरह, वो भी क्यों न मनाए बहनदूज||


इतना सहने की खूबी हममें, इस औरत जात में जनम के साथ मिलती है|

क्या पहले क्या शादी के बाद, हमारी जिंदगी एसे ही निकलती है|



By Vikas Kumar Lodhi




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