घर की याद
Updated: May 31, 2023
By Addittya Ch Saha
कमजोर होगया हु, शायद, अकेला भी
घर बोहोत याद आ रहा है, मां तुम भी।
काश! मैं, वहा तुम्हारे पास होता
तो मुझे जरूर तुम्हारे साथ का सुखद अहसास होता।
यहा भैय्या है मेरा खयाल रखने के लिए, और दोस्त भी
पर तुम्हारे बिना मिल रही अपने आप से शिकस्त भी।
अपने हालात बताकर तुम्हे दुखी नहीं करना चाहता
इसीलिए कलम की जुबान से कागज़ पर हु उतारता।
सब कुछ बेरंग सा लग रहा हैं तुम्हारे बिना, सब फीका भी
लग रहा है मानो सब भुला जो कुछ था सीखा भी।
बैठा रहता हु तन्हा तन्हा, भूल रहा हु अपनी छत का वो कोना
मन ही मन याद करके घर का गलियारा, आता है मुझे रोना।
फिर मन मजबूती पाता है यह सोचकर
कुछ ही दिनों में घर जाना है परीक्षाएं देकर।
जिसने अपनी ममता के आंचल से मुझे है सवारा
उस मां का हु मैं लाडला, हु दुलारा।
By Addittya Ch Saha

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