गूमसूम हो क्यो?
By Rucha Oke
गूमसूम हो क्यो?
कूछ तो कहो ।
दिल की बात,
आँखो से कहो ।
गुस्ताखियां मेरी,
माफ तुम करदो ।
हसके जरासी,
अब गुफ्तगु करलो ।
यही, नजाकत तुम्हारी,
पसंद हैं हमें।
अनकही सही, - बेवजाह,
हमसे बात जरा करलो।
एक नज़्म सा तुम्हें हम,
हर लम्हा पढ़ रहें है।
तेरी हर इनायत पे खुदको,
मेहरबां कर रहे हैं।
जीतनाभी पाऊं तुझे,
मुझे कम ही, क्यो लगे?
दिल-ए-हसरत ये कहें,
बस तेरी रज़ा मिले।
तूने प्यार ऐसे किया,
बिन मांगेही सबकुछ दिया।
तुझसे इश्क करने का,
नया बहाना, दे दिया।
By Rucha Oke

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