गुरु।।…
By Abhimanyu Bakshi
मेरी जज़्बातों से लिखी कहानी वो साकार कर सकता है,
ख़्वाबों की बड़ी सी बगिया गुल-ए-गुलज़ार कर सकता है।
ताकि मैं उसे इल्म, अक़्ल, शोहरत, पाकीज़गी से भर सकूँ,
मैले वो मेरे कटोरे को चमकदार कर सकता है।
हम इस दुनिया में आए किसी नन्हे से पौधे के मानिंद हैं,
वो हमें फूलों से सजाकर ख़ुशबूदार कर सकता है।
बुनियाद अपनी भुलाए बैठा है ज़माना आज का,
वो इतिहास-ओ-सभ्यता की अज़मत बरकरार रख सकता है।
पैसा बाँटकर किसी का भला करना तो फिर भी आसान है,
वो इल्म बाँटकर दीन को भी दातार कर सकता है।
कस के कमर सब निकल तो जाएँगे शिखर की जानिब,
पर वो हमारी मेहनत को असरदार कर सकता है।
मुश्किल है तेरे लिए उनका मोल चुका पाना मनु,
अपने गुरु का महज़ तू सत्कार कर सकता है।
गुरु वाले हैं जो, क़िस्मत वाले हैं,
गुरु ही ख़ुदा तक जाना ग़ैर-दुशवार कर सकता है।।…
By Abhimanyu Bakshi

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