गुरु पूर्णिमा
By Vidhi Maheshwari
होते है हर किसी के जीवन मे कुछ लोग ऐसे,
गिली मीट्टी के नसिब हो मूर्तीकार जैसे...
तराशते है हमे अपनी मेहनत से ऐसे,
तराशता हो कोई शिल्पकार किसी पत्थर को जैसे...
घड़ते है इस तरह वो हमारे व्यक्तीत्व को,
के हम मे उभरते व्यक्ती पर नाज होता जहां: को...
बूनते है हम मे हमारे अपनों के सपनो को,
अथक जतन करते है हमारा भविष्य उज्वल बनाने को...
जैसे हमारे गलतियौ को करते नही है वो नज़र अंदाज,
वैसे ही हमारी उन्नती पर भी करते है वो नाज़...
उनकी हौसलाअफजाई छेडती है हमारे दिल मे बढते हौसलो का साज,
उनकी दी हुई प्रेरणा ही होती है हमारी कामियाबी का राज...
इस संसार मे बढते हर विद्यार्थी के जीवन मे उसके गुरु ने लिये प्रयत्नो को सलाम,
"गुरु पूर्णिमा" के इस शुभ अवसर पर हमारे आदरणीय गुरुओं को तहे दिलसे प्रणाम...
By Vidhi Maheshwari

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