गुजरा कल
By Rahul Jaiswal
उन गलियों में जब भी ठहरता हूँ आज भी उनका याद आता है,
जब भी गुजरता हूँ वो गीत फिर उस जवाने का याद दिलाता है,
फिर जवानी का वो दिन याद आता है
फिर उनसे मिलने को दिल चाहता है,
मैं जब भी ठहरता हूँ उन यादो की छांव में
उनका घर याद आता है,
वो चोरी चुपके देखने का फिर मन कर जाता है
उन यादों के बगीचे में उनसे एक बार फिर मिलने को दिल चाहता है,
जो कह न पाए तब अब कहने को दिल चाहता है,
मैं जब भी उन गलियों में ठहरता हूँ आज भी उनका याद आता है
By Rahul Jaiswal

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