गुज़ारिश
By Hrishita Rajpurohit
नज़र अंदाज करना चाहा,
लेकिन शायद लकिरों को कुछ और गुज़ारा था।
दूर जाने की कोशिश की थी हमने
लेकिन उनकी एक गुज़ारिश ने रोक लिया हमे।
रोज़ देखा करते थे उन सब को हस्ते,
शायद खुद को भी वहां पाना चाहा था।
दूर जाने की कोशिश की थी हमने
लेकिन उनकी एक गुज़ारिश ने रोक लिया हमे।
जब उनसे बात करनी चाही तो,
उन्हें कुछ दूर सा पाया हमने,
पास जाके देखा तोह
उनको तो हमसे प्यार ही नहीं था।
दूर जाने की कोशिश की थी हमने
लेकिन उनकी एक गुज़ारिश ने रोक लिया हमे।
गलत वो नहीं थे लेकिन गलत हम भी नहीं थे,
हमने तो सिर्फ़ प्यार चाहा था,
लेकिन उन्हें शायद वो भी गंवारा नहीं था ।
दूर जाने की कोशिश की थी हमने,
दूर जाने की ,कोशिश की थी हमने
लेकिन उनकी एक गुज़ारिश ने रोक लिया हमे।
By Hrishita Rajpurohit

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