गुज़रता वक्त!
By Sabiha Mohammed (Shadan)
आज लगता गुज़रता वक्त ठहरा है।
उन मासूम सी आँखें में, क्या वो चेहरा मेरा है?
मुस्कुराती तो में भी हूं, उसको देख कर
पर क्या? उस मुस्कुराहट में, वो अक्स मेरा है?
सुलगता है रोम रोम एक छूवन से उसकी…
मानो जैसे, तपती धूप और सेहरा है ।
ना जाने दिल कौनसी पहेली बूझ रहा?
ये सोच पर फकत उसका ही पहरा है ।
आज लगता गुज़रता वक्त ठहरा है ।
उन मासूम सी आँखें में, क्या वो चेहरा मेरा है?
By Sabiha Mohammed (Shadan)

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