गीत दिवाली
By Surendra Kumar Sharma
इस दिवाली घर पर मिलने
कोई नहीं आया |
त्यौहारों पर घर जाने की
हो गई खत्म प्रथा |
घर-आँगन सूने -सूने से
कहने लगे व्यथा |
सभी बधाई संदेशे तो
व्हाट्सएप ही लाया ||
भेजी अगर मिठाई भी तो
नौकर ले आया |
खड़े-खड़े बाहर से कोई
विश करके आया |
जिनको याद किया था हमने,
वो ही नहीं आया ||
चिट्ठी-पत्री खत्म हो गई
कार्ड भेजना बंद हुआ |
संदेशे ईमेलें लातीं
कभी-कभी छलछंद हुआ |
ओढ़े खड़े व्यस्तताओं को़
मन ने भरमाया ||
By Surendra Kumar Sharma

Comments