गांधी जी क्यों चुप रहते हो
By Surendra Kumar Sharma
गांधी जी क्यों चुप रहते हो,
चुप रहकर सब कुछ सहते हो।
*
देखो अपनी आंखें खोलो,
सारे मंजर बदल रहे हैं।
हंसते थे जो लोग कभी वो,
उनके नयना सजल रहे हैं।
देख घृणा को क्या कहते हो।
गांधी जी क्यों चुप रहते हो।।
*
झूठ सत्य में आकर खोई,
और अंहिसा पग-पग रोई।
चरखा बापू टूट गया है,
खादी का संग छूट गया है।
बिगड़े हाल देखकर हर दिशि,
क्या गाँधीजी तुम दहते हो।
गांधी जी क्यों चुप रहते हो।।
*
राम राज्य के तुम संवाहक,
सपनों का यह देखो भारत।
हम खुश होते थे जो नाहक,
बोझिल दिल से पढ़ी इबारत।
देख देख यह दिल रोता है,
क्या तुम अब भी ज्यों बहते हो।
गांधी जी क्यों चुप रहते हो।।
*
By Surendra Kumar Sharma

Comments