गाँव से मेरे चिट्ठी है आई
Updated: Jul 24, 2025
By Menka Gupta
आज गाँव से मेरे चिट्ठी है आई
उन खेतों की महक संग अपने ले आई
खोलते ही मानो स्वाद आगया
जैसे मेरे घर का वो चूल्हा संग ले आई
आज गाँव से मेरे चिट्ठी है आई
मेरे आँगन की खुशबू भर ले आई
चूम कर उस चिठ्ठी को लगा
माँ की गोद का एहसास कर ले आई
आज गाँव से मेरे चिट्ठी है आई
हरे रंग की छींटे है कागज़ पर छाई
मेरी हमसफ़र ने जैसे अपना दिल भेजा हो
धड़कनो की आहट फर उस चिठ्ठी ने सुनाई
आज गाँव से मेरे चिट्ठी है आई
दोस्तों की हसी की आवाज़ फिर आई
साथ में भेजा हो मानो उन्होंने सन्देश
देख कर उसे मेरी आँखें भर आई
आज गाँव से मेरे चिट्ठी है आई
हम जब देश के लिए जान छिड़कते हैं
तब किसी कोने में हमारे लोग
उसी जान की दुआ करते है
जिन पलों में हम देश को सब कुछ समझते है
परिवार भी तब हम पर नाज़ करते हैं
इस चिट्ठी की कीमत कोई समझ न पाए
आज गाँव से चिट्ठी नहीं मेरी कुछ सांसें है आई
By Menka Gupta

Comments