गलतियां
By Kunal Verma
उन पर हुकूमत, हमारी शौक़त शान बनेगी,
बदले की ये आग मिटेगी,
फिर लहरे हमारी ओर मुड़ेगी,
जब फंदा उनके गले घोट कर,
हमारे गले बंधाएगा।
आएगा,
वो समय जब आएगा,
जब खुद पर मुसीबत आन पड़ेगी।
सांस घोट कर, आज़ादी कचोट कर
आज गुरूर से सीना भर गया है।
दुहाई के पुकार से बहर,
हर मस्जिद का हौसला मर गया है।
आज इंसानों ने देवों को भी शर्मसार किया है।
धर्म के धागे से
मानवता का कफन सजाया है।
दम घुट रहा इस छद्म उदारवादी से
जिसने देशभक्ति का तिलक,
इंसानियत के खून से लगाया है।
आएगा
वो समय भी आएगा,
जब खुद पर आन पड़ेगी।
तानाशाही आज मीठी बर्फी हैं
कल ज़हरीली कड़वी पकवान लगेगी,
जब आन पड़ेगी।
जब बिलकते बकबकाते, खुली सांस हम ढूंढेंगे
जब खौफ के सिकंदर हर गलियों में कूदेंगे
जब बिटिया के नैनों से खून के आसुं बुंदेंगे
जब दिखेगा मंज़र बर्बादी का,
भूकमरी से मर रही आबादी का,
जंगलराज इन फांसिवादी का,
तब कहेंगे जब आन पड़ेगी,
खुद के मुसीबत जब जान पड़ेगी,
की यही कार्रवाई तो चाहिए थी,
अपनी ज़मीन पर अपना हक
कटे गलो पर सर ऊंचा रख,
हम अपनी खुशी मनाए,
के हर लाश पर हम अपना परचम लहराए,
हम ऐसा धर्म प्रसिद्ध इतिहास बनाए।
पर थोड़ा सा बस फेर बदल हो गया है,
अंधकार में अब हमारा दल ही खो गया है।
तब बीती बातें भूल ना जाना,
उनके खोखले वादे तब दोहराना।
जब वो भी कहे, इन्हे अब क्या ही निभाना।
तब नया जुमला वो लाएंगे,
फिर नए मुद्दों पर मायाजाल बिछाएंगे,
जिसमें अगले पिछले सब लिपट कर रह जाएंगे।
तब क्या करोगे?
तब जागोगे...
जब आएगा,
वो समय भी आएगा,
जब खुद पर मुसीबत आन पड़ेगी।
By Kunal Verma

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