गम और खुशी
By Bhagyashri Babanrao Ghuge
इन निगाहों से आँसुओं का लिबाज़ लिए,
दूर कहीं किसी आलम में हर गम झोंक दिए ।
अब ना लाज़मी है उन गमों की माथे पर सिलवटें,
कब तक यूँ ही बिना रुख़ बदले किस्मत लेगी करवटें ?
गम तो ज़िंदगी के साथ मिली सौगात है
और खुशी तकदीर ने बाँटी एक ख़ैरात है ।
इसलिए अब मसरूफ़ उन खुशियों की तलाश में होना है ।
लकीरों से दूर, जहाँ ना गम हो, वहीं अब खोना है ।
फ़र्क सिर्फ़ नज़रिये का है, अगर हो खुद पर एतबार,
तो खुशियों को ज़िंदगी से साझा करने में ना करना इंकार ।
वो एक दिन फिर ज़रूर होगा,जब खुशियों के हम मुवक्किल बनेंगे
और तब , मुस्कान लिए शरीक हर महफ़िल में होंगे।
By Bhagyashri Babanrao Ghuge

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