ख्याल
By Kavita Batra
ऐसा नहीं कि कह नहीं सकती ,
बिन बोले कोइ समझ सके ऐसा ख्याल क्यों हो नहीं सकता ।
पूछने पर तो सबके लिए मैं हस के बोल देती हूं, कि हाल एक दम बढिया हे, आंखो से कोइ समझ सके ऐसा ख्याल क्यों हो नहीं सकता ।
दर्द दिखाती नहीं, कि बिना वजह किसी से बात न करनी न पढ जाए , हक से हाथ पकड़ कर कोई कह दे कि रुक जा एक पहर , ऐसा ख्याल क्यों हो नहीं सकता ।
ऐसा नहीं कि कह नहीं सकती ,
बिन बोले कोइ समझ सके ऐसा ख्याल क्यों हो नहीं सकता ।
By Kavita Batra

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