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खो जाता

Jul 4, 2024
1 min read

Updated: Jul 6, 2024

By Maninder Singh



कभी मुझे जिसका साथ था

वो तेरा बच्चों सा स्वभाव था

पर मैं तो आजकल

हवा बनकर तुझमे ढूंढता

वो ही स्वभाव जिसको याद कर

मैं अपने आप में ही हँस लेता हूं

खो जाता हूं मैं याद कर

तेरा बच्चों सा का साथ को

यह कैसा समय

तेरी यादें जब सपने बनकर आते

जिन्हें देख खो जाता तुझ में मैं

और धीरे-धीरे बहता मैं

तेरी यादों की नदी में

कैसा संयोग है यह

जब तुम भी मेरी यादों में,


एक अनजान रास्ते पर चलकर

तुम्हारे बच्चों सा स्वभाव ने

मुझ से कहा था

की तुम मेरे बिन खो ही जाओगे,

और यह भी कहा था

की यह कभी नही छोर कर जायेगा

जब तुमने कहा था उन्हें

उस शाम को

पर मैं तो आजकल

हवा बनकर तुझमे ढूंढता

वो ही स्वभाव जिसको याद कर

मैं अपने आप में ही हँस लेता हूं


खो जाता हूं मैं याद कर

तेरा बच्चों सा का साथ को

यह कैसा समय

तेरी यादें जब सपने बनकर आते

जिन्हें देख खो जाता तुझ में मैं

और धीरे-धीर बहता मैं

तेरी यादों की नदी में,

कैसा संयोग है यह

जब तुम भी मेरी यादों में


By Maninder Singh

 
 
 

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