खूबसूरत हो या कहर कोई
Updated: Dec 6, 2022
By Khayaal (Motilal Parakh)
खूबसूरत हो या कहर कोई,
मीठी इतनी जैसे जहर कोई,
अब मार ही डालो तुम मुझे,
जो तू शाम हो, न सहर कोई।-
मैं तीर हूँ, हो तुम लहर कोई,
मैं शीत, हो तुम दोपहर कोई,
मैं सूखी एक मंजिल हूँ यहाँ,
तू बूंदों की है रहगुज़र कोई।-
तेरी बातों का ना है हर्ज़ कोई,
बगैर तेरे ज़िन्दगी है मर्ज़ कोई,
तेरा इश्क है इक दवा दिल की,
पर तेरा इश्क भी तो दर्द कोई।
ना मांगता और हमसफ़र कोई,
हो तू मंजिल, फिर सफ़र कोई,
बीती ये ज़िन्दगी ये आस में ही,
तुझे देख गुज़रे एक पहर कोई।
करो तुम बातों की पहल कोई,
परेशान हूँ, तुम बनो हल कोई,
ना कहनी आती दिल की बात,
तुम देखो, हो जाए बसर कोई।
मुझको भी ज़रा सी चहल कोई,
एक मेरे नाम पे हो ग़ज़ल कोई,
तुम ख़ामोशी से सही कह देना,
जो मैं शायरी हूँ तुम बहर कोई।
By Khayaal (Motilal Parakh)

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