खूबसूरत नही
By Abhishek Bagri
फिर कभी ना कहना तुम खूबसूरत नहीं।
तुम सूरज की उस पहली किरण सी हो, जो हजारों सितारों की रोशनी फीकी करदे,
उस बहती हवा की तरह, जो छूकर निकले तो सुकून से भरदे,
वो ठहरा पानी जिसमें सब खुदको सुंदर पाते है,
तुम उस मौसम सी हो जो भीगा दे सबको, सबको चंचल करदे।
तुम उन गिरती हुई बूंदों सी हो, जो पल में जमीन की प्यास दूर करदे,
उस सर्दी कि नमी की तरह, जो सामने आया हर ढर धुंधला करदे,
वो खिलता हुआ फूल, जिसकी महक में मुरझाए फूल अपना दर्द छुपाते है,
वो चाय का पहला घूंट जो सबको दीवाना करदे,
एक बात कहता हूं याद रखना,
एक बार कहता हूं याद रखना,
इस मुस्कान के सिवा तुम्हे किसी श्रृंगार की जरूरत नहीं,
फिर कभी ना कहना तुम खूबसूरत नहीं।
फिर कभी ना कहना तुम खूबसूरत नहीं।
By Abhishek Bagri

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