खुशी और गम
By Poonam Kumari
ज़िंदगी की कोरी किताब पर
मैंने सोचा खुशियों के पल लिखूं
पर ज़िंदगी ने सवाल किया
तुमने दुनिया में आते ही
सबसे पहले रोए
तभी तो तुम जीवित हुए
तो गमों के पलों को क्यों भुला दिया
मैंने जिंदगी से कहा
खुशियों के पल देते हैं मुझे हौसला
नहीं आने देते मेरे आने वाले कल
और मेरे आने वाली खुशियों में फासला
ज़िंदगी मुस्कुराई
तुम शायद भूल गए
कि मिली थी तुम्हें
उन गम के पलों से
आगे बढ़ने की हिम्मत
और सीखा था तुमने
अपनी और लोगों की करनी इज्ज़त
यह बात सुनकर
हुआ मुझे ऐहसास
कि दोनो ही हैं अलग जज़्बात
फिर भी दोनो हैं मेरी कोरी ज़िंदगी में ख़ास
और फिर मैंने उस कोरी किताब पर लिखा
खुशी और गम दोनो ही हैं मेरी ज़िंदगी का हिस्सा
यही मिलकर बनाते हैं मेरी ज़िंदगी हर एक किस्सा
By Poonam Kumari

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