खुशियों की लहर
Updated: Dec 2, 2022
By Dixit Tarun Shah
खुशियों की लहर जब होंठों पे चिपक सी जाए,
समज लो मौसम इससे हसीन और हो नहीं सकता।
कोई यहां बीते कल की गिरफ्त में है,
तो कोई आने वाले कल की फ़िक्र में है,
काश कोई अपने आज में जीने की चाह में मिल जाए।
आज होठों पे मुस्कान चिपक सी गई है,
शायद मौसम में उसिका ज़ायका मिल सा गया है।
इससे ज़्यादा ख़ुश अब मैं हो नहीं सकता,
अगर नज़र लगे अब मेरी इन खुशियों को,
तो इनके बाद अब मैं रो भी नहीं सकता।
दिल के तहखाने में कैद कर लिए हैं इन पलों को,
मौसम का ये दौर अब बदल नहीं सकता,
इश्क का गुलाल अब रंग छोड़ नहीं सकताl
हां !!
यादों में बसे है वो,
उन्हे चाहकर भी अब भूला नहीं सकता।
By Dixit Tarun Shah

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