खुश-मिज़ाजी।।…
Updated: Nov 18, 2022
By Abhimanyu Bakshi
ये भी ज़रूरी है ज़रा ध्यान रखना,
हर वक़्त चेहरे पर इक मुस्कान रखना।
सूरत-ए-हाल जब मुश्किल सवाल पूछे,
अपने जवाबों में बस इत्मिनान रखना।
ताल्लुक़ रखो महज़ ख़ताओं से सीखे सबक़ से,
अफ़सोस-मलाल के बाग वीरान रखना।
आंसू आँखों से जब फिसलने को हों,
आँखों में क़ुबूलियत की ढलान रखना।
बिछड़े कभी किसी वक़्त शायद वापिस आना चाहें,
ज़िंदा टूटी दोस्ती के निशान रखना।
अपनी हो दुश्मन की या हो ख़ता ज़माने की,
पहले हाथ मिलाने का ईमान रखना।
बंद आँखों को अंधेरा नहीं रोशनी मिलेगी,
ज़ेहन में ख़्वाबों का आसमाँ रखना।
हर कोई पढ़ सके ऐसी किताब नहीं दर्द-ए-दिल की,
बाहर एक अलग दास्तान रखना।
By Abhimanyu Bakshi

Comments