top of page

खिड़की से रिस्ता

Dec 24, 2022
1 min read

By Sasmita Kumari Pradhan


खिड़की में बैठकर बाहर देखने का,

मजा ही कुछ और है ;

दूर से बैठकर बाहर के नज़ारो का ,

आनंद लेना और ;

बारिशो की बूंदों से अपनी कुछ ,

यादों को भिगोना ;

कड़कती धूपो से कुछ ,

खुद को समेटना ;

और दूर से ठंडी हवाओ को ,

आलिंगन कर सहलाना ;

सच में खिड़की से मेरा कुछ ,

अलग ही रिस्ता है |




ख़ामोशी से प्रकृति से बात करना ,

मेरी हर दिन की आदत है ;

सूरज की पहली किरणों की लालिमा से ,

खुद को भिगोने का अंदाज ही अलग है ;

खिड़कियों में बैठी चिड़ियों की मासूमियत भरी हरकतों को,

घंटो घंटो निहारते रहना ;

हवाओं के साथ उड़ती बादलों को अपने दर्द को बहा,

ले जाने की फ़रियाद करना ;

रातों को सुन्न कड़ी टीम टिमाते तारो में ,

माँ को ढूंढ़ना ;

बाहरी दुनिया से चार दीवारों के अन्दर जीने का ,

सच में मजा ही कुछ और है |


चिड़ियों की उड़ान को देख कर अपनी आशाओं को ,

बुनना तो वो मेरा पागलपन है ;

बादलों की आकारों को जानवरो सा कल्पना करना ,

वो भी मेरा बचपना है ;

और तारों के साथ गुमशुम खड़ी माँ साथ बात करना ,

तो आज भी मेरी आदत है ;

शायद यही वजह और जगह है जो मेरा रिस्ता खिड़की से ,

इतना अनोखा और प्यारा है ;

जब चाहा खुद को अकेला किया और जब चाहा अपनी ,

हर ख़ामोशी की हमसफ़र से रिस्ता जोड़ा |


By Sasmita Kumari Pradhan



Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page