खिड़की पर चीटियां
By B Bindu
बरसों पुरानी बात है,
हुई कहानियां सात है।
जब अम्मा ने सेंकी रोटियां,
और थी खिड़की पर चीटियां।
मुन्ना बड़ा है नटखट,
चाहे जानना सब झटपट।
घोर अंधेरी रात में,
चले दोस्त सात, साथ में।
कब्रगाह, हवेली, पुराने घाट,
वश में करने मंत्रों-पाठ।
भागते दोस्त मुन्ना दंग,
हश्श...अंधेरे में है कोई संग।
थाली बांटी, देखा घर,
भूख बड़ी, चीटियां थी पर।
छुपा दिया मुन्ने ने रोटियां,
खिड़की पर जहां खा सके चीटियां।
आज भी मुन्ने की आंखों की चमक चमकदार है,
कहानियां खोजने मन बेक़रार है।
साथ न चाहे कभी पर,
जुनून गुरूर साथ है।
आंखें चौड़ी कान खुली,
बाकी तो अभी पूरी रात है।
बरसों पुरानी बात है,
हुई कहानियां सात हैं।
जब अम्मा ने सेंकी रोटियां,
और थी खिड़की पर चीटियां।
By B Bindu

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