खास दोस्त के लिए
By Vibhav Saxena
मैं भी कुछ फुरसत-सी पा जाऊँ,
और तू भी थोड़ा खाली हो जाए|
कहीं बैठें साथ में हम दोनों फिर से,
संग चाय की इक प्याली हो जाए||
याद आ जाता है अक्सर बचपन,
साथ में खेलना और झगड़ना भी|
लड़कर फिर आँखों में आँसू आना,
यारों संग बेमतलब का हंसना भी||
काश लौट आएं अपने पुराने दिन,
हर फिक्र केवल ख्याली हो जाए|
कहीं बैठें साथ में हम दोनों फिर से,
संग चाय की इक प्याली हो जाए||
अब तो अपने दिल की बात को,
बस दिल में रखना ही अच्छा है|
लोगों के मन में आ चुका है फरेब,
कहाँ अब हर एक इंसान सच्चा है??
तू सुनकर हर तकलीफ दिलासा दे,
तो अंधेरे दिल में दीवाली हो जाए|
कहीं बैठें साथ में हम दोनों फिर से,
संग चाय की इक प्याली हो जाए||
कहने को तो जमाने भर के लोग,
और रिश्तों से भरी ये जिन्दगी है|
पर सच कहूं तो मतलबी दुनिया में,
आज भी सच्चे दोस्तों की कमी है||
तू बेमतलब भी रखे जो हाथ पे हाथ,
तो खुशियों की एक ताली हो जाए|
कहीं बैठें साथ में हम दोनों फिर से,
संग चाय की इक प्याली हो जाए|
By Vibhav Saxena

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