खाली खाली जाम है
By Karan Handa
खाली खाली जाम है,
बेदर्द बड़ी ये शाम है,
मंजिल तक था जाना जिन्हें
रास्ते वो बेईमान है,
खाली खाली जाम है,
बेदर्द बड़ी ये शाम है!
सुबह से शाम रूठी है,
कोई जैसे हसरत टूटी है,
दस्तूर दुनिया का कब राख हो,
कब उजड़े पंछी आबाद हों
अनहोनी सी एक बात है,
कि मिल जाऐ सुबह- शाम क्भी,
बस यही रात की फ़रियाद है
खाली खाली जाम है,
बेदर्द बड़ी ये शाम है!
ये धुआँ कैसा बिखरा है,
किसकी है ये लाश जली,
हम आशिक हुए मौत के,
ये ज़िन्दगी की बात नही,
इन आँखों का भी किस्सा है,
जो मुझको – मुझमे दिखता है,
वो अक्स है तेरा, तेरा ही बस नाम है,
खाली खाली जाम है,
बेदर्द बड़ी ये शाम है!
By Karan Handa

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