खामोशी
By Yashaswi Agrima
कुछ कहना था तुमसे
चुप से रह गए हम,
खामोशी भी दगा कर गई और
बहुत कुछ कह गए हम|
कहीं तुम्हारा भी दिल पिघला होगा
और कहीं हमने भी गलती की,
तुम्हे उनके साथ देख कर भी
हमनें मोहब्बत की|
खुश थे तुम भी मगर
कुछ कह न पाये,
आँखों ने कह दिया और
हम ज़रा सा मुस्कुराये|
बस यहीं तक थी एक खूबसूरत शमा,
फिर तुम चल दिए कहीं और हम चल दिए कहाँ,
अधूरी ही सही हमारी कहानी तो थी
दिल ने ये बात जानि भी तो थी।
By Yashaswi Agrima

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