खामोशी
By Monika Sha
आजकल एक ख़ामोशी हैं
जो हर पल मुझसे कहती हैं
कि तू क्यों खामोश हैं
क्यों सबसे अलग रहती हैं।
पर इस सवाल का जवाब मैं जानती
तो शायद ही बता पाती
कि क्यों मैं खामोश हूं
क्यों सबसे अलग रहती हूं।
इस ख़ामोशी के बारे में क्या कहूं
कोई खुश होता तो कोई दुखी
कि मैं खामोश क्यों हूं
क्यों सबसे अलग रहती हूं।
पर वह यह नहीं जानते
की इस ख़ामोशी की वजह से
मैं मुस्कुरा पाती हूं
सबकी बातें सुन पाती हूं।
यह ख़ामोशी मुझे अपने आप से
लड़ने की ताकत देती हैं
किसी विषय में सोचने का समय
तो खुद से बातें करने का समय देती है।
इस शोर भरी दुनिया के बीच में
यह ख़ामोशी मेरी आत्मा को शांति देती हैं
शायद इसलिए मैं खामोश रहती हूं
कभी-कभी सबसे अलग रहती हूं।
By Monika Sha

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