"खत्म होती संवेदनाएँ "
By Shweta Khati
खत्म होती संवेदनाएँ,
फिर भी जीवित है हृदय
सख्त दिखते चेहरे
भयभीत हैं पर,
विचलित हैं भीतर से,अधीर हैं
एक सधी हुई चाल, और हाव-भाव हैं पर ।
और तौर-तरीके तमाम सीखते-सीखते
अब हँसी और चेहरे,
सब कुछ बनावटी से लगते हैं ।
बिल्कुल कागज़ी फूलों से,
जिनको महकाया गया हो इत्र से ।
देखा था तुमने ?
मॉल के उस पुतले को
हँसता नहीं है खुलकर
सेल्फ-इमेज मेन्टेन रखता है।
देखा था मैंने,
'सेल्फी' और 'सेल्फ' के खेल में घिरे
आधुनिक-आधुनिकाओं का उस दिन
मुस्कुराना कैमरे की ओर...
By Shweta Khati

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