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"ख़ुदा नाराज़"

Nov 12, 2022
1 min read

By ZafarAli Memon


कमाल है कमाल है

मज़हब की बात पर

क्यूँ उठ रहे सवाल है


बेहाल है बेहाल है

सब मकड़ियों के जाल है

दुनिया में रहना भी अब

बहुत बड़ा जंजाल है


बवाल है बवाल है

गुज़र रही जो ज़िंदगी

यह दिन है या कोई साल है

मुझे आज की फ़िक्र तो है

मुझे कल का भी ख़याल है





नक़ाब है नक़ाब है

हर चेहरे पर नक़ाब है

जो शख़्स की यह ज़ात है

वह साँप का भी बाप है

जो दो-रुख़ा किरदार है

ग़ज़ब है बे-मिसाल है


दलाल है दलाल है

सब सोच के दलाल है

गुनाह भी उसका माफ़ है

सब पैसे की यह चाल है


क्या काल है क्या काल है

ख़ुदा भी जो नाराज़ है

'इबादतों में मिल रहे

जल्दबाज़ी के आ'माल है


ख़ुद सोचना अब तो तू ज़रा

मज़हब की बात पर

क्यूँ उठ रहे सवाल है


कमाल है कमाल है


By ZafarAli Memon




 
 
 

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