क्षणभंगुर
Updated: Jun 10, 2023
By Nikhil Tandon
“क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
पल-पल प्रतिपल चलती श्वासें, जाने कब ये बन्द हो जाएँ
इस नगरी में आया है तो, पूरी कर अपनी अभिलाषाएँ
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
राग-द्वेष के वश में आकर, संयम तेरा न खोने पाए
चाहे जितनी भी चेष्टा, जीवन में विपत्तियाँ कर जाएँ
तीर निकाल कमान से ऐसे, कि लक्ष्य तेरा चूक न पाए
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
कर शपथ खुद से ही तू, कदम तेरे कभी न रुकने पाएँ
चल सदा तू ऐसे पथ पर, वर्चस्व तेरा ही हर दिशा लहराए
काँटे हो जिस भी धरा पर, उसी धरा पर तू फूल खिलाये
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
संकट कितने भी हों जीवन में, कांति मुख की न खोने पाए
योद्धा की भाँति लड़ तू उनसे, परास्त कभी न होने पाए
चट्टान बन के खड़ा हो ऐसे, प्रहार कैसा भी तू सह जाए
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
प्रयत्न कर जीवन में ऐसे, कोई स्वप्न अधूरा न रह जाए
हृदय विशाल हो मेरु जैसा, ग्लानि कोई न घर कर पाए
चल संग साथ तू लेकर सबको, पीछे कोई छूट न जाए
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
व्यक्तित्व अपना निखार तू ऐसे, कि शत्रु कोई न बन पाए
अहं से रख तू दूरी इतनी, कोई अपना आहत न होने पाए
निष्ठुरता से बैर ही रखना, क्रोध कितना भी तुझे उकसाए
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए
सीमित है यह अपना जीवन, समय न तू व्यर्थ गंवाए
पल-पल प्रतिपल चलती श्वासें, जाने कब ये बन्द हो जाएँ
इस नगरी में आया है तो, पूरी कर अपनी अभिलाषाएँ
क्षणभंगुर है जीवन अपना, जाने कब ये नष्ट हो जाए”
By Nikhil Tandon

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