क्योंकि तू नहीं
By Nivedita Arya
घर अपना नहीं लगता,
क्योंकि तू पूछने को नहीं,
बचपन धुंधला लगता है,
क्योंकि तू वापस उसे जीने को नहीं,
जिंदगी अंधेरी लगती तेरे बिना,
क्योंकि तू साथ चलने को नहीं,
कंधे पे तेरे सिर रखने का मन करता....
तेरे से बेटा-बेटा सुनने का मन करता...
झगड़ने का मन करता........
तेरी डांट को वापस सुनना चाहती हूं मैं
पर तू मिलता ही नहीं.......
तुझे क्या पता, लेकिन जब तू गया ...
मेरा घर, बचपन और गुस्सा
तीनों ले गया तू अपने साथ
By Nivedita Arya

Comments