top of page

क्योंकि, जीवन का अनमोल समय है तरुणावस्था

Jan 7, 2023
1 min read

Updated: Jul 29, 2025

By Kanchan Joshi



भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी,

कुछ काम जो वो रोज़ करता है,

पर महत्व है उन रिश्तों का, समझौतों का,

जिनका वो भोग करता है।


यूँ तो जीवन में अनेक कर्म हैं,

और सभी का सार बस एक सुख,

फल की आशा करते ही चले गए,

मधुर बोल न कह सके दो टूक।

कभी सोचती हूँ,

क्यों सारी मिथ्याओं को यथार्थ समझ जीवन जोग करता है,

क्योंकि,

महत्व है उन रिश्तों का, समझौतों का,

जिनका वो भोग करता है।


जीवन के इस पहिये की दो पीढ़ियां और चलती हैं,

बालपन की नटखट,

जिनके नन्हे पैरों में कुछ कर गुज़रने की स्मृतियाँ पलती हैं।

दूजा,

स्फूर्ति के दिन याद करते बचपन की हरकतों से लिपटा बुढ़ापा,

सुबह लाठी का सहारा और दवाइयों के साथ शाम ढलती है।

फिर क्यों हर क्षण पतझड़ भरे काल में

पावक हो जाने का संजोग करता है,

क्योंकि,

महत्व है उन रिश्तों का, समझौतों का,

जिनका वो भोग करता है।


गर इतना कमा सको की हाथ न फैलाना पड़े,

तृप्त होगा मन भले सर हो धूप खड़े।

पैसों के पेड़ रोपते गए,

यह सोच कि कल पैसों का पेड़ उगेगा,

न बोये तूने रिश्तों के पेड़,

तो संकट की घड़ी में कौन मैदान उतरेगा।

परम सुखार्थ है वो जीवन

जो छोटों को प्रेम और बड़ों के आशीष का जोग करता है

क्योंकि, महत्व है उन रिश्तों का, समझौतों का

जिनका वो भोग करता है।


By Kanchan Joshi



Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page