क्यों मुंबई मुझे खुद से अलग नहीं होने देती है
By Priyansh Jaiprakash Singh
मचलते सपने दौड़ती ज़िन्दगी
किसी को चैन से बैठने नहीं देती है,
फिर भी मुंबई मुझे खुद से
अलग नहीं होने देती है।
ट्रैफिक का शोर और खुद का
मकान पाने की होड़,
सभी को छकझोर देती है,
फिर भी मुंबई मुझे खुद से
अलग नहीं होने देती है।
यहाँ की उमस और लोकल ट्रैन
की भीड़, सभी का मूड ख़राब कर देती है,
फिर भी मुंबई मुझे खुद से
अलग नहीं होने देती है।
मैं विचार करता रहता हूँ की
क्यों मुंबई मुझे खुद से अलग नहीं
होने देती है और पट से मेरा मन कहता है,
यहाँ के समुद्र तट,
मेहनत की क़द्र,
महिलाओं की भागेदारी,
सभी वर्ग और प्रान्त वासिओं की हिस्सेदारी,
और सबसे ऊपर मुंबई Spirit
जीवन का हिस्सा नहीं बल्कि
जीवन शैली है, इसलिए मुंबई मुझे खुद से
अलग नहीं होने देती है।
By Priyansh Jaiprakash Singh

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