क्या हो तुम ?
By Pratyush Jain
मरेी जन्नत भी तमु मरेी मन्नत भी तमु
मरेी कलम हो तमु तलवार भी तमु
की गलु शन हो तमु बहार भी तमु
इक बं दू हो तमु
बौछार भी तमु
मरेा दि न हो तमु
मरेी रात भी तमु
मरेेशब्द हो तमु
मरेी हर बात मेंतमु
मरेेअरमान हो तमु मरेेहालात भी तमु
मरेा अक्सहो तमु मरेेजज़्बात भी तमु
या यूकहु की
मरेा इश्क हो तमु
और मरेी जात भी तमु
और क्या हो तमु
आज मझु ेबता भी दो!
शहर हो या गांव हो
धपू हो या छांव हो
फि जा हो तमु या धलू हो
मशरूफ हो कहीं या फि जलु हो
कि ज्यादा समझ आती नहीं तमु
पर लगता हे
कि सी सं दु र बागबान का भी सबसेनायाब फूल हो
और बोला करती हो कि ऐब हैंतम्मु ेबोहोत पर सनम मश्किुश्कि लात की कोई बात नहीं ना
की हमेंतो तमु ऐसेही परूेकेपरूेक़बलू हो
By Pratyush Jain

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