क्या है तेरी पहचान
By Kirti Thakur
खुद से खुद सवाल करता है
खुद से तू है कितना अंजान
जिस पर है इतना अभिमान
बता क्या है तेरी पहचान?
रूप तेरा या रंग तेरा
साथी तेरे या संग तेरा
मन तेरा या सपने तेरे
दोस्त तेरे या अपने तेरे
जिनमे बसते है तेरे प्राण
बता क्या है तेरी पहचान?
करता है जो काम तेरा
व्यवहार तेरा या नाम तेरा
मुकाम तेरा जो तूने पाया
या हुनर जो तू साथ था लाया?
ज्ञान का घमंड है,
क्या है घमंड का ज्ञान?
बता क्या है तेरी पहचान?
धन जो तूने खूब कमाया
घर जो अलीशान बनाया?
बच्चा वह जो तूने जाया
बता कहां से ये सब आया?
इनमें से किसने दिया नींद, सुख, आराम
बता क्या है तेरी पहचान?
रंग-रूप समय के साथ ढला
मरने के बाद कौन संग चला?
मन, सपनो में उलझा रहा सदा
दोस्तो और अपनो ने ही छला
इन सब पर की झूठी शान
बता क्या है तेरी पहचान?
काम तेरा कभी काम ना आया
लेन देन व्यवहार बनाया
मुकाम जिस पर टिक नहीं पाया
हुनर घमंड के साथ गवाया
ये सब बचा सके नहीं आन
बता क्या है तेरी पहचान?
इंसान बनो इंसान रहो तुम
महान नहीं आसान बनो तुम
काम पड़े तो काम में आए
ऐसा सरल सामान बनो तुम
तू रहे या ना रहे
बना रहे सदा तेरा मान
मानवता तेरी पहचान...
मानवता तेरी पहचान...
By Kirti Thakur

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