-क्या मोल हैं इस रंग का-
By Sakshi Joshi
क्यूँ रंग होकर भी बेरंग है!
क्यूँ सफेद है रंग कोरा,
दूजे रंग का छींटा लगे तो है दाग बुरा!!
क्यूँ किसी ने रंगों को छोडा,
और कोरा कपडा ओडा!
जब आत्मा ने काया को छोड़ा,
तब काया ने भी (सफेद) कोरा कफन ओढ़ा!
कोरे पर जब चडे लाल,
बन जाए रंग ख़ुशहाल!
फिर खुशहाली मे क्यूँ,
सफेद रंग का साया बुरा है!
क्यूँ अनहोनी का चिन्ह,
सबसे खरा है!
क्यूँ रंगों मे सबसे बुरा है,
खुशहाली-अनहोनी दोनों से जुड़ा है !!
क्यूँ रंगों की दुनिया ने,
इसे तिरस्कारा है!
क्या मोल है इसका,
जिंदगी मे हमारी!
क्यूँ रूठे हैं रंग इससे,
चढे है सफेद रंग जिसपे!
रंग भी हैं कितने अनोखे,
खुशियों मे सजे,
और दुःख मे छोड़े!!
जीवन में रंगों की गहराई है,
पर सफेद को समझना कठिनाई है!
कठिनाईयों को समझता है जो,
साँस लेकर भी क्यूँ ,
शव सा है वो!!
जिन खुशियों मे,
हर रंग शामिल हो!
क्यूँ उनमें सफेद,
बेमेल हो!!
कोरे पन्ने पर रंगीन कलम चले तो,
विद्या का सार हो!
सफेद कपडे पर रंग छलके ,
तो क्यूँ अभागा त्याग हो!
क्यूँ शक्ति का रंग लाल है,
रंग सफेद भी तो,
स्वच्छता की मिसाल है!!
By Sakshi Joshi

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