क्या मैं तुम बन जाऊं?
By Suraiya Akbari
क्या मैं तुम बन जाऊं?
खुद में ही गुम हो जाऊं?
मैं शहर सी अकेली
तुम रात सी कोई पहेली
इस पहेली को मैं कैसे सुलझाउं?
मैं तुम कैसे बन जाऊं?
तुम जैसे कोई गुनगुनाता साज
मैं कुछ अनकहे से अल्फाज़
तुम जैसे किस्सों की डायरी
मैं कोई मुख्तलिफ सी शायरी
मैं शायरी से किस्सा कैसे हो जाऊं?
मैं तुम कैसे बन जाऊं?
तुम आज़ाद सी बहती फिज़ा
मैं खुद में कैद कोई सज़ा
तुम जैसे हर किसी को मालूम पता
मैं खुद में छुपी हुई सी खता
मैं यह खता कैसे बताऊं?
मैं तुम कैसे बन जाऊं?
बेशक, तुम मेरी मोहब्बत हो
पर मैं मेरी जरूरत हूॅं
मैं यह कैसे भूल जाऊं?
मैं तुम कैसे बन जाऊं?
By Suraiya Akbari

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