क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
By Dr.Trupti Upadhyay
तुम्हे अच्छा लगता था इन लबों का मुस्कुराना,
अब हम रोज रोते है,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था मैं ढेर साडी बातें करू,
अब हम बिलकुल खमोश रहते है,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था हम रोज खुदको सँवारे,
अब आईने से परहेज़ हे हमें,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था मैं खुलके जीऊ,
अब खुदको समेटे हुए हैं,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था दिल खाली करदु,
अब दिल कुछ ज्यादा भर गया हैं,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था पल पल का हमारा साथ,
अब बिलकुल तन्हा से हे हम, क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था सपने सच हो जाये सब,
अब तुम्ही ख्वाब हो हमारे,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था तुम मुझे हरपल देखो,
अब हम हरपल तुम्हे ही ढूंढते हैं,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
तुम्हे अच्छा लगता था की हमें तुम्हारे साथ ही अच्छा लगता था,
अब तो हमें हमारा साथ भी गवारा नहीं,क्या तुम्हे अच्छा लगेगा?
By Dr.Trupti Upadhyay

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