क्या खूब है !
By Ms. Mule Swarupa Deepak
उस भगवान की दुनिया क्या खूब है !
धूप से बचने के लिए पेडोंकी छाँव है |
अकेलापन है अगर तो दोस्ती भी है ;
परिश्रम है अगर तो सुस्ती भी है।
कभी दिन का उजाला है तो कभी अंधेरी रात है ;
एक दुसरे का दर्द समझ सके ऐसे जज्बात है |
खामोशी को तोडनेवाली ऐसी यहा बातें है ;
इंतजार है अगर तो मुलाकाते भी है।
धोखा है अगर तो विश्वास भी है ;
हर मुश्किल तोड सके ऐसी आस भी है |
बेचैनी है अगर तो सुकूँ की सांस है ;
झूठ है अगर तो सत्य का आभास भी है।
घाँव है अगर तो राहत भी है ;
नफरत है अगर तो चाहत भी है |
ख्वाब है अगर तो हकीकत भी है ;
विश्वासघात है अगर तो इंसानियत भी है।
इस दुनिया में तो वो हर कुछ है;
अच्छा हो या बुरा यहा सब कुछ है |
ये उस ईश्वर के सोच का असर है;
बुराई की वजह से हमें अच्छाई की कदर है।
By Ms. Mule Swarupa Deepak

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